12वीं के बाद अब नहीं होगी दाखिले की चिंता…

du-cut-off-listहर साल सीबीएसई के बारहवीं के नतीजे आने के साथ ही दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित कॉलेजों में दाखिले की दौड़ शुरू हो जाती है। दशमलव के बाद के अंकों का महत्व दिल्ली यूनिवर्सिटी कॉलेजों की कट-ऑफ लिस्ट देखने के बाद ही पता चलता है। 99.8, 99.6, 99.4…और 97% आने तक सारा खेल ख़त्म। इससे कम आने वाले बच्चों को फिर सुनना पड़ता है, बेटा थोड़ी और मेहनत कर लेते तो तुम्हारा क्या चला जाता।

जब तक कट-ऑफ लिस्ट नहीं आती तब तक बारहवीं की परीक्षा पास करने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों को दिन-रात तनाव से और गुज़रना पड़ता है। बस यही फ़िक्र खाये जाती है कि अच्छे कॉलेज में दाखिला मिलेगा या नहीं।

ऐसी स्थिति से निपटने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति  ईरानी की अध्यक्षता में  दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रबंधन, कॉलेज प्रिंसिपल, प्राइवेट कोचिंग इंस्टीट्यूट्स के संचालकों ने एक बैठक में विचार किया। इस बैठक में जिन बिंदुओं पर सहमति बनी वो इस प्रकार है-

1. बच्चों को मानसिक तनाव से बचाने के लिए कट-ऑफ घोषित करने की प्रथा को जड़ से ही खत्म कर दिया जाए। एसआरसीसी, सेंट स्टीफंस, हिंदू कॉलेजों के प्रिंसिपल ने सुझाव दिया कि कट-ऑफ को हर साल के लिए 100% निर्धारित कर दिया जाए। इससे जिन बच्चों के इतने मार्क्स नहीं आएंगे, वो पहले से ही तैयार रहेंगे कि उनका दाखिला नहीं होगा और वो अवसाद से बचे रहेंगे।

2. अब बच्चों के 100%  मार्क्स कैसे आएं, इसके लिए फिटज़ी, आकाश, अग्रवाल क्लासेज़ जैसे प्राइवेट कोचिंग इंस्टीट्यूट ने सामूहिक तौर पर  तैयार किया गया एक प्रेजेंटेशन बैठक में पेश किया। इस प्रेजेंटेशन में बताया गया कि उनके बताए रास्ते पर चला जाए तो बारहवीं में श्योर-शॉर्ट 100% मार्क्स के साथ बच्चा दिल्ली यूनिवर्सिटी तो क्या देश के जाने माने किसी भी प्रोफेशनल इंस्टीट्यूट में भी दाखिला पा लेगा। इसके लिए उन्हें बस प्राइवेट इंस्टीट्यूट्स के 3+12 कोर्स में दाखिला लेना होगा। 3 का मतलब यहां नर्सरी, एलकेजी, केजी से है। मज़बूत इमारत की पहचान उसकी बुनियाद से ही होती है। इसलिए ‘स्टार्ट फ्रॉम बर्थ’ स्पेशल पैकेज से नर्सरी से ही बच्चे को आईआईटी, एम्स और दिल्ली यूनिवर्सिटी के टॉप कॉलेज  में दाखिले के लिए तैयारी शुरू करा दी जाएगी।

3. बैठक में विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर आईआईएन कोऑर्डिनेटर सबसे बाद में बोलने के लिए उठे। सभी का ध्यान उन्हीं पर था कि वो क्या कहते हैं। आईआईएन के कोऑर्डिनेटर ने मुस्कुराते हुए कहा कि आप सब बेकार में इतनी चिंता कर रहे हैं। आने वाला ज़माना आईआईटी, एम्स, आईआईएम का नहीं आईआईएन का होगा। हम मोबाइल पर ही ऐसे  एप ले आएंगे कि बच्चा जो करियर भी सोचेगा, उसके लिए वो बिना किसी स्कूल-कॉलेज जाए या औपचारिक शिक्षा ग्रहण किए पूरी तरह दक्ष हो जाएगा। बस इसके लिए एक छोटी सी शर्त होगी। बच्चे को हमेशा नींद में ही रहना होगा। क्योंकि सपने तो सिर्फ नींद में ही देखे जा सकते है ना।

बैठक के अंत में केंद्र की ओर से स्मृति ईरानी, उनके जूनियर मंत्री राम शंकर कठेरिया और दिल्ली राज्य सरकार के क़ानून मंत्री जितेंद्र तोमर ने डिग्री विषयक सवालों के विस्तार से उत्तर दिए कि कैसे तमाम कठिनाइयों के बावजूद इनमें निपुणता हासिल की जा सकती है।

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