कोरोना इकोनॉमी वारियर्स ‘टल्ली सेना’ के जज़्बे को सलाम

कोरोना से लड़ाई कई स्तर पर लड़ी जा रही है, एक तरफ हमारा मेडिकल स्टाफ, सेनिटाइज़र स्टाफ, आवश्यक वस्तुओं और दवाइयों के विक्रेता इस लड़ाई को लड़ रहे हैं तो वहीँ दुसरी तरफ हिचकोले खाती अर्थव्यवस्था को संभालने का ठेका नशे में झूमती देश की टल्ली सेना ने उठा लिया है।

हमारे देश पर जब कोरोना ने हमला किया तो लड़ने के लिए हॉस्पिटल में तैयारी नहीं थी, हमारे पास टेस्टिंग किट और पीपीई किट जैसे हथियार नहीं थे। पर कोरोना से लड़ने वाले वारियर्स का हौसला नहीं टूटे, इसके लिए हमारी सरकार ने कभी ताली-थाली, तो कभी दिए जलवा कर और कभी फूल की बारिश करके एक तीर से दो निशाने साधे। एक तरफ जनता जश्न जैसे माहौल के नशे में कमियों को भूल गई, बल्कि कहीं कहीं तो खुद ही लड़ाई लड़ने के लिए ‘गो कोरोना गो’ जैसे नारे लगाते हुए और इन नारों को गाना समझकर इसकी धुन पर थिरकते हुए लड़ने के लिए मैदान में आ गई। वहीं दूसरी तरफ हमारे वारियर्स का मनोबल भी बढ़ा, वो अलग बात है कि लड़ाई के हथियारों की कमीं के कारण हमारे कई वारियर्स कोरोना की चपेट में आ गए। पर जब युद्ध हो रहा हो तो यह सब तो चलता है।

मुश्किल तब सामने आई जब कोरोना युद्ध चलते हुए डेढ़ महीने का समय बीतने लगा, तो सरकार को हिचकौले खाती अर्थव्यवस्था की चिंता हुई। पर हमें गर्व होना चाहिए अपनी सरकार के ऊपर कि उसने इसका हल भी निकाल लिया। अर्थव्यवस्था को संभालने का ठेका शराब के ठेके खोलकर टल्ली सेना को दिया गया।

फिर क्या था हमारे यह वारियर्स भी अपनी जान हथेली पर लेकर निकल पड़े युद्ध के मैदान में, आज आप जिधर भी देखो टल्ली सेना ही नज़र आ रही है। हर ठेके पर हज़ारों की लाइने लगी पड़ी हैं, एक-दूसरे के ऊपर पिलकर पड़े यह वारियर्स कई गुना महंगी शराब खरीदकर जल्दी से जल्दी अर्थव्यवस्था को संभालने की ज़िद पर अड़े हुए हैं। लाइने भले ही लम्बी हों, पर क्योंकि देश का सवाल है सो इन्हे कोरोना छोडो पुलिस का भी डर नहीं है। हालाँकि यह भी है कि यह जानते हैं कि यह कोई जमाती तो है नहीं जो इन्हे जेल में ठूस दिया जाएगा या फिर चाटुकार सॉरी-सॉरी पत्रकार अपने स्टूडियों में इन्हे कोरोना फैलाने का ज़िम्मेदार ठहराने की गुस्ताखी करेंगे? और वैसे भी यह तो कोरोना से चल रहे युद्ध में अहम् रोल निभा रहे हैं, तो देश को इनकी क़ुर्बानी पर नाज़ होना चाहिए।

देश की जनता से मेरी यह मांग है कि फूलों, तालियों-थालियों के सम्मान के हक़दार तो यह लोग भी हैं, बल्कि इस लड़ाई में एक-दूसरे के साथ मिलजुल कर हज़ारों की लाइन में लगे इन योद्धाओं को धयान से देखेंगे तो पता चलेगा कि यह लड़ाई लड़ रहे हैं बिना किसी पीपीई किट जैसे सुरक्षा इक्विपमेंट और सोशल डिस्टेंसिंग के ही लड़ रहे हैं। तो इनका सम्मान किया जाना बेहद ज़रूरी ही नहीं है बल्कि जल्द से जल्द किया जाना चाहिए। बल्कि मैं तो कहता हूँ कि यह आज कि यह ज़रूरत है कि जल्दी से एक दिन इनके सम्मान के लिए तय किया जाए, इससे पहले कि कहीं कोरोना से लड़ते हुए टल्ली सेना का कोई वारियर कहीं कोरोना शहीद ना हो जाए।

मेरी तरफ से कोरोना के इकोनॉमी वारियर्स के जज़्बे को सलाम।

जय हिन्द

 

Ghanta News: Only Humour – No truth

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