आज के नेता और बेचारी जनता!

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If the public and the ‘leader’ is like this, then it’s impossible to tie a rope by democracy’!

अगर जनता ऐसी और ‘नेता’ ऐसा हो तो ‘लोकतंत्र’ की रस्सी से बांधकर रखना नामुमकिन है! 

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